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महाभारत: आधुनिक समय का प्रतिबिंब

  • लेखक की तस्वीर: Pal Patel
    Pal Patel
  • 2 दिन पहले
  • 4 मिनट पठन

महाभारत के बारे में हम सब बचपन से सुनते आये है। बचपन से हमे महाभारत की कहानिया सुनाई जाती है - की वो लड़ाई 5000 साल पहले घटित हुई थी , तब कौरवो और पांडवो आपस में लड़ पड़े थे वगेरे काफी कुछ हमे इसके बारे में बताया गया है। परतु क्या आप जानते है ये 5000 साल पहले की कहानी आज के ही समय का वर्णन है ? कैसे ? आईये जानते है।


1. कौरव - पांडव युद्ध


महाभारत में कौरवो और पांडवो के बिच राज सिंहासन के लिए किये गए युद्ध को दर्शाया है। अब उसको आज के समय के हिसाब देखे तो आज लगभग हर घर में बापदाद की मिलकियत को लेकर भाई - भाई आपस में लड़ते रहते है। तो ये लाखो - करोडो घर परिवारों में हो रहे ये जगड़े का रूपक कौरवो और पांडवो के बिच के युद्ध से दर्शाया गया है।


2. गांधारी के सौ पुत्रो का मटके से जन्म


महाभारत में गांधारी के १०० पुत्र का जन्मा मटके से दिखाया गया है। माना कौरव का जन्मा गांधारी के गर्भ से नहीं हुआ। तो ये मटका हुआ artificial womb यानि आज कल test tube babies है, फिर incubators भी आ गए है जिसमे premature babies को रखा जाता है। अभी ये incubators का अंदर का माहौल बिलकुल माता के गर्भ के अंदर के माहौल जैसा ही बनाया जाता है। इसके आलावा मटके को हम surrogacy के साथ भी compare कर सकते है। कैसे? देखो मटका गोल होता है और माता का गर्भ भी लगभग उसी आकर का होता है। महाभारत में मटके से जन्मा दिखाया गया है यानि कोई ऐसा गर्भ जो खुदका नहीं पर कोई और स्त्री का हो। भल बच्चा उसका हो परन्तु गर्भ उसका न हो। तो ऐसा तो surrogacy ही हो सकता है।


3. द्रौपदी का वस्त्रहरण दुर्योधन द्वारा


महाभारत की वह हृदयविदारक घटना, जहाँ भरी सभा में द्रौपदी का अपमान हुआ, वह केवल एक पौराणिक कहानी नहीं है। आज अगर हम अखबार उठाएं या सोशल मीडिया देखें, तो हर दिन हमें मासूम लड़कियों और महिलाओं पर होने वाले अत्याचार और बलात्कार की खबरें मिलती हैं।


दुख की बात तो यह है कि यह अत्याचार सिर्फ बाहर वालों द्वारा ही नहीं, बल्कि अपनों और घर के सदस्यों द्वारा भी किया जाता है। महाभारत में पांडव (अपने पति) और भीष्म पितामह (बुजुर्ग) जैसे लोग चुपचाप देखते रहे, जो आज के उस समाज को दर्शाता है जो अन्याय होते हुए भी मूकदर्शक बना रहता है। तो महाभारत में वर्णित कहानी केवल एक द्रौपदी और दुर्योधन की नहीं बल्कि ये कहानी उन लाखो द्रौपदी की है जिन पर ऐसे दुर्योधन अत्याचार करते रहते है।


4. कुंती और कर्ण


महाभारत में कुंती ने लोक-लाज और समाज के डर से अपने पहले पुत्र कर्ण को जन्म देते ही त्याग दिया था। आज के समय में देखें तो इसे हम 'Teen Pregnancy' या 'Unmarried Mothers' की समस्या से जोड़ सकते हैं। आज भी कई बार कम उम्र की लड़कियां अनजाने में गर्भवती हो जाती हैं और समाज क्या कहेगा, परिवार की इज्जत जाएगी—इसी डर से वे अपने मासूम बच्चे को अनाथालय में छोड़ देती हैं या किसी को गोद दे देती हैं। सालों बाद जब वह बच्चा बड़ा होता है और अपनी असली माँ को ढूंढते हुए उसके पास पहुँचता है, तब तक उस माँ की शादी कहीं और हो चुकी होती है और उसके दूसरे बच्चे भी होते हैं। वह बच्चा अपने ही सगे भाई-बहनों से अनजान रहता है और जब वे आपस में मिलते हैं, तब उन्हें पता चलता है कि वे एक ही माँ की संतान हैं। ठीक वैसे ही जैसे कर्ण और पांडव एक ही माँ के पुत्र थे, पर जीवन भर एक-दूसरे के लिए अजनबी और दुश्मन बने रहे।


5. गांधारी के आँखों पर बंधी पट्टी


अक्सर हम गांधारी की पट्टी को उनके त्याग और पतिव्रता होने का प्रतीक मानते हैं, लेकिन इसका एक और गहरा और व्यावहारिक पहलू भी है। आज के समाज में अपराध और गलत काम बढ़ने की एक बड़ी वजह 'परिवार का मौन समर्थन' है। एक माँ या पत्नी में वह शक्ति होती है कि वह अपने घर के पुरुषों को गलत रास्ते पर जाने से रोक सके।


लेकिन, आज कई माताएं और पत्नियां अपने पति या पुत्र के मोह में इतनी अंधी हो जाती हैं कि उनके गलत कामों को नजरअंदाज करती रहती हैं। वे जानते हुए भी कि उनका बच्चा या पति गुनाह कर रहा है, उसे रोकने के बजाय उसे बचाने की कोशिश करती हैं। गांधारी की आँखों पर बंधी वह पट्टी असल में उसी 'अंधे मोह' को दर्शाती है, जो अंत में पूरे परिवार के विनाश का कारण बनती है। जब हम अपने अपनों की गलतियों पर पर्दा डालते हैं, तो हम भी गांधारी की तरह विनाश को न्योता देते हैं।


तो दोस्तों, महाभारत कोई ऐसी कहानी नहीं है जो बस घटित हुई और खत्म हो गई। यह तो एक आइना है जिसमें हम आज के समाज को साफ देख सकते हैं। चाहे वो प्रॉपर्टी के लिए भाइयों का झगड़ा हो, आधुनिक तकनीक (Test tube babies) हो, महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार हों या परिवार का अंधा मोह—महाभारत का हर हिस्सा हमारे आज के जीवन का ही वर्णन है। यह 5000 साल पहले की गाथा नहीं, बल्कि आज के कलयुग का ही रूपक है। जरूरत है तो बस अपनी आँखों से पट्टी हटाकर इसे सही नजरिए से समझने की।


 
 
 

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